हमारे संस्थान का आधार यह अमर श्लोक है:
इस श्लोक में जीवन की सफलता का मार्ग बताया गया है। सच्ची विद्या सबसे पहले मनुष्य के भीतर विनय (नम्रता) पैदा करती है। जब व्यक्ति विनम्र होता है, तो वह सीखने के लिए तैयार होता है, जिससे उसके भीतर पात्रता (योग्यता/Skills) आती है। जब व्यक्ति योग्य और कुशल बन जाता है, तो उसे धन (सफलता और समृद्धि) प्राप्त होती है। उस धन का उपयोग जब वह धर्म (सत्कर्म और समाज सेवा) के लिए करता है, तब अंततः उसे सच्चे सुख और संतोष की प्राप्ति होती है।
"श्री शिवाय स्किल्स" केवल एक Open विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि एक मिशन है। हमारा ध्येय शिक्षा (Education) को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर उसे व्यावहारिक कौशल (Skills) से जोड़ना है। हम एक ऐसे समाज का निर्माण कर रहे हैं जहाँ एक हाथ में हमारी प्राचीन संस्कृत की विरासत हो, तो दूसरे हाथ में आधुनिक IT और तकनीकी विशेषज्ञता हो।
हमारा लक्ष्य हर उस जिज्ञासु को सशक्त बनाना है जो स्वयं को अपग्रेड करना चाहता है। हम सीखने की उम्र की सीमा को खत्म कर परंपरा और प्रगति को साथ लाने के लिए समर्पित हैं।